MOHABBAT SHAYARI

MOHABBAT SHAYARI

MOHABBAT SHAYARI

मैंने मोहोब्बत से समझौता कर लिया
हैं,
सुना हैं मोहोबत हो जानें का नाम
हैं, वफ़ा वो के वहम मे “

” अजीब हालत होते हैं मोहोब्बत में
दिल के उदास जब भी यार हो
कसूर आपने लगता हे !”

“काश ए दिल तू एक उम्र उधार ले
कर आ जा कही से,
माना की मोहोब्बत एक आदत हैं तेरी,
फिर लूट के देख एक बार फिर “

” मुश्किल हैं दिल-ए-कलम से
समझौता कर पाना,
ए वह सब्र था जो मुददतो से प्यासा था”

” मोहोब्बत का कोई मजहब नहीं,
यही बेफिक्री हमें ले डूबेगी एक दिन दफ्न
होती ख्वाइशो में”

” मैं तो मोहोब्बत थी साहब, सबसे
अलग,
दुनिया ने मुझे मजहब का पाठ पढ़ा दिया “

” सूना हैं वो शख्स बहुत ही खुश
रहता हैं,
शायद ही वो उस राह से गुजरा नहीं
होगा,जंहा मोहोब्बत बसती हैं ”

” हर शख़्स की निग़ाह थी मेरी
मोहोब्बत की तस्वीर ,
मोहोब्बत ही तो थी हुजूर , इतना भी
क्या बवाल “.

” मुझ से मेरे ख्वाबों की इंतिहा न
पूछिए जनाब ,
हजारों राते गवा दी एक मुक्कमल
निंद के लियें “.

” मोहोब्बत-ए-कस्ती का कोयी
मुक्कमल किनारा नहीं साहब,
ए तो वह दौलत हैं जिसका कोयी
हक़दार नहीं ” .

मैं वो रूह हूँ जो सिर्फ तेरे एक दीदार से
ही सवार जाएगी
तू जो इजाजत दे तो मेरी मोहोब्बत भी
तेरी मोहोब्बत बन जाएगी

PYAR MOHABBAT SHAYARI

होश मैं हो तो जाना ही क्या है की
मोहोब्बत क्या होती है
किसी की मोहोब्बत में होश खो बैठोगे तो
खुद रूबरू हो जाओगे

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